जब जब भी खाली करते हो तुम
अपनी चुप्पियों से भरा झोला मेरे सामने
चुन लेती हूँ मैं उनमें से
सारे ताने ,उलाहने और शिकायतें
अपने हिस्से की -
फिर भी बची रह जाती है
धीमी धीमी सांसे लेती
उलझनों और संदेहों की
एक छोटी सी पोटली .
यही होता आया है अक्सर
आज भी रह गयी वह पोटली
और तुमने फिर से उसे
अपने झोले में डाल लिया ...
जानती हूँ अगली बार फिर उँडेल दोगे
उसे मेरे सामने
कुछ नए तानों उलाहनों के साथ
और फिर उस बोझिल होती पोटली को
यूँ ही छोड़ कर चल दोगे तुम
मैं तुम्हारे चेहरे पर अधखिले फूल सी मुस्कराहट
देखने के लिए फिर से चुन लूंगी
उन सारी शिकायतों को
और तुम्हारी चुप्पियाँ
बनती रहेंगी जानलेवा
हर बार ........
अपनी चुप्पियों से भरा झोला मेरे सामने
चुन लेती हूँ मैं उनमें से
सारे ताने ,उलाहने और शिकायतें
अपने हिस्से की -
फिर भी बची रह जाती है
धीमी धीमी सांसे लेती
उलझनों और संदेहों की
एक छोटी सी पोटली .
यही होता आया है अक्सर
आज भी रह गयी वह पोटली
और तुमने फिर से उसे
अपने झोले में डाल लिया ...
जानती हूँ अगली बार फिर उँडेल दोगे
उसे मेरे सामने
कुछ नए तानों उलाहनों के साथ
और फिर उस बोझिल होती पोटली को
यूँ ही छोड़ कर चल दोगे तुम
मैं तुम्हारे चेहरे पर अधखिले फूल सी मुस्कराहट
देखने के लिए फिर से चुन लूंगी
उन सारी शिकायतों को
और तुम्हारी चुप्पियाँ
बनती रहेंगी जानलेवा
हर बार ........