Sunday, 3 November 2024

दीपावली

दीपमालाओं की अचकचाती सी रोशनी के भय से भागते तिमिर के अवशेषों में सुन कर पटाखों का कोलाहल कहा एक जुगनू ने दूसरे से, " क्या यही तरीका रह गया है शेष मिटाने का अस्तित्व हमारा?" जवाब मिला," इन कंक्रीट के जंगलों में बसने वालों को, ज्ञात नहीं महत्व हम कीट पतंगों का। क्योंकि ये स्वयं ही तो जी रहे हैं जीवन हम कीड़े मकोड़ों सा- रेंगता, सरकता, घिसटता!"