कोकून
उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
Monday, 31 October 2011
विकल्प
तुमने कहा तुम बरसोगे
और मैं अंजुरी बन गयी
तुमने कहा तुम बिखरोगे
मैं आँचल सी बिछ गयी
अब तुम चाहते हो आस्मां से गिरना
पर मैं खजूर नहीं बनूँगी तुम्हारे लिए
कभी नहीं -
गले लगाना मेरी नियति है
गिरना तुम्हारा स्वाभाव
क्या कोई विकल्प है मेरे पास ?
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