मन हुआ परिंदा
शाख के सुर्ख पत्तों में बसाया
सुनहरा घरौंदा अब कहीं आबाद हुआ ।
अब देखना रोज़ समेटेगा
तुम्हारी प्रीत के तिनके
और
चहचहाएगा उम्र के आख़िरी पड़ाव तक ....!
शाख के सुर्ख पत्तों में बसाया
सुनहरा घरौंदा अब कहीं आबाद हुआ ।
अब देखना रोज़ समेटेगा
तुम्हारी प्रीत के तिनके
और
चहचहाएगा उम्र के आख़िरी पड़ाव तक ....!