Saturday, 17 May 2014

सुनो
वक़्त और तारीखें अक्सर मुझे याद रहते हैं
तारीखों पर जमी बर्फ पिघलने पर
लम्हों की तितलियाँ नींद से जाग जाती हैं
 और
वो तमाम ख़्वाहिशें,जो डुबो दी थीं मैंने
झील की गहराई में -
फिर से तैरने लगतीं हैं किनारे की ओर बेतहाशा
देखते ही तुम्हारा अक़्स कहीं आस पास ……
यक़ीनन
वक़्त गुजरने पर उगने लगेंगे वो नीले फूल भी
जिनके रंग उड़ कर कभी
आसमान बन गए थे
देखना -
आज उन तितलियों के पंखों से बनेगा
मेरे और तुम्हारे शहर के बीच एक इन्द्रधनुष
जिसमें घुल कर कल का सूरज
कुछ ज्यादा ही सुनहरा हो जायेगा !!!

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