एक ख़्वाहिश -
केसरिया धूप में बिखरी हरित घास
हर दिल में खुशहाली, छाई आस...
आओ, प्रातः स्मरण करें उन तमाम रक्त-बीजों का, जिनकी बदौलत आज 71 वें गणतंत्र का यह उल्लास चहुँ ओर छाया है. कामना करें कि यह उत्सव सदैव मनता रहे और हमारी युवा पीढ़ी की रग-रग में लहू बन कर दौड़ता रहे. प्रार्थना करें कि संविधान का उपहास उड़ाने वालों पर खंजर की भाँति ईश्वर का कहर ढहे और उनकी चेतना विलुप्त होने से पूर्व उन्हें आज़ादी के सही मायने समझ आयें. जिस सोच के साथ बाबा साहेब ने भारतीय गणतंत्र की स्थापना की, वे आदर्श जन-जन के हृदय में घुल मिल जाएं. तिरंगे की शान में कटे शीशों के बलिदान का मूल्य चुकाना होगा. यही ख़्वाहिश आज से हर दिल में जागे, तो भारत का गौरव विश्व में प्रमुखता से बढ़ता जाएगा.
बहुत आसान नहीं रही होंगी ये राहें,
बस, इतना समझना और समझाना है..
जय हिंद!
नीलम शर्मा
केसरिया धूप में बिखरी हरित घास
हर दिल में खुशहाली, छाई आस...
आओ, प्रातः स्मरण करें उन तमाम रक्त-बीजों का, जिनकी बदौलत आज 71 वें गणतंत्र का यह उल्लास चहुँ ओर छाया है. कामना करें कि यह उत्सव सदैव मनता रहे और हमारी युवा पीढ़ी की रग-रग में लहू बन कर दौड़ता रहे. प्रार्थना करें कि संविधान का उपहास उड़ाने वालों पर खंजर की भाँति ईश्वर का कहर ढहे और उनकी चेतना विलुप्त होने से पूर्व उन्हें आज़ादी के सही मायने समझ आयें. जिस सोच के साथ बाबा साहेब ने भारतीय गणतंत्र की स्थापना की, वे आदर्श जन-जन के हृदय में घुल मिल जाएं. तिरंगे की शान में कटे शीशों के बलिदान का मूल्य चुकाना होगा. यही ख़्वाहिश आज से हर दिल में जागे, तो भारत का गौरव विश्व में प्रमुखता से बढ़ता जाएगा.
बहुत आसान नहीं रही होंगी ये राहें,
बस, इतना समझना और समझाना है..
जय हिंद!
नीलम शर्मा