Friday, 13 March 2020

भरे पेट लोगों के दरवाजों की ओर बढ़ते अन्नदाताओं को
कंटीले पथ से लेकर
पत्थरों के नुकीलेपन का भान होना चाहिए
उसे होनी चाहिए ख़बर
कि तलवों की चमड़ी भी छिलना जानती है
या कि गुलाब नहीं बिछे होते
हर सफ़ेदपोश के बगीचों की राह में!

उसे मालूम होना चाहिए कि
चंद सिक्के भी नहीं बटोर पाएगी
उसकी मरी हुई देह
और उसी के रक्त से पोती जाएंगी
उन आलीशान घरों की दीवारें
जिनका रंग अक्सर सफ़ेद हो जाता है!

उसे वाकिफ़ होना चाहिए
कि अन्न उगाने से अधिक
उसे पचा लेने वाला महान् होता है
जो प्लास्टिक के दाने बेच रोग खरीदता है
और उसके इलाज़ का खर्च
तुम्हारे बच्चों के मुख से छीने निवाले ही भरते हैं !

हे अन्नदाताओं!
अपने करोड़ों देवी देवताओं का आव्हान करो
जो शक्ति दें तुम्हें
उन लाल रंग से पुती दीवारों को
उतना ही सफ़ेद कर देने की
जितना सफ़ेद लिबास पहने वे बचते रहे हैं
लहू के छींटों से....!!!

Monday, 2 March 2020

दिलवालों की दिल्ली देखो
आज लहू से नहाई है
फागुन के महीने में अब की
खून की होली आयी है!

फर्क़ न कोई पाया होगा
रंग रक्त का लाल ही होगा
प्रेम ख़ुशी के मौसम में क्यूँ
नफ़रत आज फैलाई है?

जाति धर्म के बंधन छोड़ो
बोल एकता के सब बोलो
चंद जनों के स्वार्थ ने मिलकर
ये दीवारें बनाई हैं.

भूल सभी अन्तर और वैर
दुश्मन की न होगी ख़ैर
एक रंग में नाचें झूमें
मस्ती की रुत आयी है...!!

नीलम शर्मा