दिलवालों की दिल्ली देखो
आज लहू से नहाई है
फागुन के महीने में अब की
खून की होली आयी है!
फर्क़ न कोई पाया होगा
रंग रक्त का लाल ही होगा
प्रेम ख़ुशी के मौसम में क्यूँ
नफ़रत आज फैलाई है?
जाति धर्म के बंधन छोड़ो
बोल एकता के सब बोलो
चंद जनों के स्वार्थ ने मिलकर
ये दीवारें बनाई हैं.
भूल सभी अन्तर और वैर
दुश्मन की न होगी ख़ैर
एक रंग में नाचें झूमें
मस्ती की रुत आयी है...!!
नीलम शर्मा
आज लहू से नहाई है
फागुन के महीने में अब की
खून की होली आयी है!
फर्क़ न कोई पाया होगा
रंग रक्त का लाल ही होगा
प्रेम ख़ुशी के मौसम में क्यूँ
नफ़रत आज फैलाई है?
जाति धर्म के बंधन छोड़ो
बोल एकता के सब बोलो
चंद जनों के स्वार्थ ने मिलकर
ये दीवारें बनाई हैं.
भूल सभी अन्तर और वैर
दुश्मन की न होगी ख़ैर
एक रंग में नाचें झूमें
मस्ती की रुत आयी है...!!
नीलम शर्मा
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