नई कोंपल की तरह
उगते ,फलते ,फूलते
नए सम्बन्ध
एकाएक झर जाते हैं
सूखे पत्तों की तरह .
किन्तु मेरे और तुम्हारे सम्बन्ध
जो कभी उगे ,फले ,फूले थे
सूख कर भी
जुडे हुए हैं आज.
टूटेंगे !क्योंकि ये सम्बन्ध हैं
पर तुम शोक मत करना
तुम तो शाख हो
नई कोंपल उगेगी तुम पर
सूखा पत्ता तो मैं हूँ
जिसे उड़ा ले जाएगी हवा
धूल से मिल कर
दुःख की पाती लिख जाएगी .
फिर भी इंतजार है
हवा के झोंके का,
जो आये और तोड़ कर मुझे
दूर कर दे तुमसे
क्योंकि ,
सूख कर भी जुड़े रहने की पीड़ा से
टूट कर गिर जाने का दर्द
कहीं बहुत कम होता है ....







