Thursday, 13 July 2017

अनगिनत ख्वाहिशें अंकुराती रहीं
यादों की गीली मिटटी में,
ओस में भीगी घास की नमी भी चुरा ली
बेरहम सपनों ने-
और अब दुआ कर रहे हैं
उस गली में बरसने की
जहाँ सितारों की छाँव में पलती हैं
तुम्हारी तमाम कोशिशें ,
अंधेरों को सूरज बना देने की.......
मैंने भी आज
बादलों के पांवों में घुँघरू बांध दिए हैं
और रात भर नींद से
जद्दोज़हद करती रही.......!

Friday, 23 June 2017

तुम ढोती रहीं
केकड़े के जाल में जकड़ी
अपनी नश्वर काया को
अनात्मवाद की पैरवी करते हुए
अपनी आखिरी सांस तक।

तनिक भी न डगमगाईं
दर्द की गांठें लगा कर मोह के बंधनों को
प्रयाग के संगम में बहाते हुए,
जहाँ आज भी सुरों के सप्तक में
गूंजती हैं स्वर लहरियां
तुम्हारे शब्दों को गंगा का आचमन कराते हुए।

उस बगीचे की खरपतवार तक अनुद्विग्न है
जहाँ तुम हंसी के ठहाके लगातीं थीं
कबूतर, गिलहरियां और अनेक परिव्राजक
अब तुम्हारे प्रेम से रीते दाने निगलते हुए
तुम्हें प्रत्यास्मरण करते हैं।

तुम देख भी न पायीं अपनी अधमुंदी आंखों से
रिश्तों का वो बनावटी पैरहन
जो अब तक तुम्हारे 'अपने' बने
पहन कर घूमते हैं
और उसे तमाम
केकडों और मकड़ियों से बचा कर रखते हैं
बिना ये जाने कि जाल बुनने का हुनर
इंसानों को बे‍हतर आता है...!!!

Thursday, 5 January 2017

जानते हो  -
मोहब्बतों के सफ़र पूरे हुए बग़ैर ही ख़त्म होते हैं
और उनमें मौसमों की ख़ुश्की
तमाम ग़ैर ज़रूरी वजहों से हमेशा बनी रहती है
लोग अब मौसम के ऐसे मिज़ाजों से नाउम्मीद ही रहते हैं
क्योंकि उनकी उम्मीदों की तलाश
दरअसल कभी शुरू ही नहीं हुई थी।
वे जानते हैं कि सूरज के सिवाय ,रिश्तों की गर्माहट की
कोई और वजह होना नामुमकिन है
और सूरज की नीली आँखों ने
अब और रंग उधार देने बंद कर दिए हैं।

सर्द सुबहों में लिहाफ़ ओढ़े,आख़िरी बार किस्से सुन लेना
अब बर्दाश्त होने लगा है
क्योंकि रात भर चले इन क़िस्सों के पाँवों में,
छालों की जगह रिसती आहों की भाप जमी हुई है
जिसे सिर्फ़ दो हथेलियों की गर्माहट की दरकार है।

इन दिनों कोहरे की दीवारें रास्ता भी नहीं रोकतीं...
उनके उगने से पहले ही आँखों की रेत का सफ़र
उसी मोड़ पे जा कर ख़त्म हो चुका है
जहाँ की पगडंडियाँ अब इंतज़ार करना भूल चुकी हैं -
वे यह भी भूल चुकीं हैं कि किस्से हमेशा वहीँ ख़त्म होते हैं
जहाँ  से शुरू हुए थे
बग़ैर उन मौसमों की परवाह किये
जिन्हें जाने के बाद आने की कभी जल्दी नहीं होती ......!!!