प्रतिदिन अरज सुनो धनिकों की
आज प्रार्थना सुनो मेरी माँ
वाहन तज उतरो मेरे आँगन
व्यथा कथा समझो मेरी माँ
अन्न कणों के दर्शन दुर्लभ
दवा-दारू को तरसे हम सब
वस्त्र आभूषण दूर की कौड़ी
दया दृष्टि फेरो इस घर माँ
जठर ताप को कठिन बुझाना
मिले नहीं दो जून का खाना
विपदा पड़ी शरण अब तेरी
वरद हस्त मुझ पर फेरो माँ
नहीं ज़रूरत उनको तेरी
जहां बंद यूं रहे तिजोरी
बचपन मेरा श्रम से जूझे
नन्हें कर और विकट कार्य माँ
प्रतिदिन अरज सुनो धनिकों की
आज प्रार्थना सुनो मेरी माँ