Sunday, 20 December 2015

बाल श्रमिक की प्रार्थना

प्रतिदिन अरज सुनो धनिकों की 
आज प्रार्थना सुनो मेरी माँ 
वाहन तज उतरो मेरे आँगन 
व्यथा कथा समझो मेरी माँ

अन्न कणों के दर्शन दुर्लभ 
दवा-दारू को तरसे हम सब 
वस्त्र आभूषण दूर की कौड़ी 
दया दृष्टि फेरो इस घर माँ 

जठर ताप को कठिन बुझाना 
मिले नहीं दो जून का खाना 
विपदा पड़ी शरण अब तेरी 
वरद हस्त मुझ पर फेरो माँ 

नहीं ज़रूरत उनको तेरी 
जहां बंद यूं रहे तिजोरी 
बचपन मेरा श्रम से जूझे 
नन्हें कर और विकट कार्य माँ 

प्रतिदिन अरज सुनो धनिकों की 
आज प्रार्थना सुनो मेरी माँ

आओ साथ मिल दीप जलाएं

आओ साथ मिल दीप जलाएं
गुमसुम चुप हो बैठ न जाएँ

सघन कालिमा जाल बिछाए 
द्वार देहरी कुछ नज़र न आए 
बाँट रोशनी राह दिखाएँ 
आओ साथ मिल दीप जलाएं 

घर और आँगन लीप पोत कर 
कोर किनारे झाड़ पोंछ कर 
सबके मन का मैल छुड़ायेँ
आओ साथ मिल दीप जलाएं 

एक हमारा एक तुम्हारा 
दीप जले चमके चौबारा 
मिल जुल कर ये पर्व मनाएँ 
 आओ साथ मिल दीप जलाएं 

आ जाए कभी कोई झोंका 
भला हवा को किसने रोका 
दोनों एक एक हाथ लगाएँ 
आओ साथ मिल दीप जलाएं 


Thursday, 10 December 2015

तुम्हारे जाने से लेकर ,मेरे जीने तक ....हथेली भर साँस बाकी रही ...एक फूँक जैसा कुछ अभी छू कर गया मुझको ...