आओ साथ मिल दीप जलाएं
गुमसुम चुप हो बैठ न जाएँ
सघन कालिमा जाल बिछाए
द्वार देहरी कुछ नज़र न आए
बाँट रोशनी राह दिखाएँ
आओ साथ मिल दीप जलाएं
घर और आँगन लीप पोत कर
कोर किनारे झाड़ पोंछ कर
सबके मन का मैल छुड़ायेँ
आओ साथ मिल दीप जलाएं
एक हमारा एक तुम्हारा
दीप जले चमके चौबारा
मिल जुल कर ये पर्व मनाएँ
आओ साथ मिल दीप जलाएं
आ जाए कभी कोई झोंका
भला हवा को किसने रोका
दोनों एक एक हाथ लगाएँ
आओ साथ मिल दीप जलाएं
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