Sunday, 26 June 2011

दर्द का रिश्ता



तुम्हारे परोसे हुए दर्दों में से
कुछ निवाले मैं ले आई हूँ अपने साथ
न जाने कितने नामों की परछाइयाँ 
पीछे खिंची  चली आई
जिनमे से कुछ को तो मैं
पहचानती भी नहीं
     तुमसे रहा होगा कुछ रिश्ता उनका
    तभी तो अपने  से लगे वे मुझे भी
    दर्द का रिश्ता
   ऐसा ही होता होगा शायद ......

Tuesday, 7 June 2011

मौन

   
पनपते विश्वासों के
अंकुरों की खेती पर ,
होता है तुषारापात .
यह  अँधेरा
हर बार अलग ढंग से
तोड़ता रहा मन
कैसे दूँ शब्द उन सपनों को ?
इसलिये मौन हूँ ....