दिलवालों की दिल्ली देखो
आज लहू से नहाई है
फागुन के महीने में अब की
ख़ून की होली आयी है.
फर्क़ न कोई पाया होगा
रंग रक्त का लाल ही होगा
प्रेम, ख़ुशी के मौके पर क्यूँ
नफ़रत आज फैलाई है?
जाति - धर्म के बंधन तोड़ो
बोल एकता के सब बोलो
चंद जनों के स्वार्थ ने मिलकर
ये दीवार बनाईं हैं.
भूल सभी अन्तर और बैर
दुश्मन की न होगी ख़ैर
एक रंग में नाचो झूमो
मस्ती की ऋतु आयी है....!!