कोकून
उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
Thursday, 29 May 2014
तमाम दर्द रोज़ एक बादल बन
आसमान में टंग जाते हैं
उम्मीद है सावन में इस बार
खारा पानी ही बरसेगा …… !!!
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