उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
Thursday, 15 November 2012
दिवाली
मन के आकाश पर घिरते अवसाद के अंधेरों में तुम्हारी स्मृति अक्सर पूनम के चाँद सी दबे पाँव ,बेआवाज़ आती है ..... और फिर सचमुच- बेमौसम ,पूनम मावस का अंतर छोड़ मेरी रग -रग दिवाली हो जाती है ........!!!!
sundar bhavapoorn rachana ...
ReplyDeleteIntense
ReplyDeletethanx a lot!
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