कोकून
उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
Wednesday, 10 September 2014
ना जाने क्यूँ
वो भी गलत होता गया
जो सही था ...
वज़ह अब तक
नतीजों के इंतज़ार में है ...!!!
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