तुम आ रहे हो न सांता ?
तुम आ रहे हो न सांता ?
सुना है तुम सिर्फ खुशियाँ बिखेरते हो
हम एक बरस और इंतज़ार कर लेंगे
तुम सरहद पार ही रुक जाना इस बार ।
चिमनी से आहिस्ता ही उतरना
कुछ माँयें तब से अब तक सोयी ही न होंगी
और अपने रेनडियर की रफ़्तार ज़रा धीमी ही रखना
कब्रें कहाँ कहाँ खुदीं हैं ,उसे ये क्या पता होगा ?
चीत्कारें अब सिसकियाँ बन चुकी होंगी
तुम जिंगल बेल्स के जादू से उन्हें गुम कर देना
अपने हाथ की छड़ी घुमा कर
स्कूल की दीवारें फिर से सफ़ेद कर देना
क्यूंकि लहू के धब्बों से तो
तुम्हें भी नफरत होगी न सांता ?
लाल टोपी -जुराबों की तो कमी ही न होगी तुम्हें
ढेर सारे छितरे पड़े होंगे यहाँ वहाँ
कुछ किताबें भी बिखरी होंगी
जिन पर लिखे हर्फ़ अब भी
खौफ़ से कंपकपा रहे होंगे ।
मासूम चेहरों और मुस्कराती आँखों की उम्मीद लेकर
मत जाना वहाँ !
उनके तकिये के नीचे ताबीज़ दबे होंगे
जिनमें "नींद आए तो भयानक ख़्वाब न सताये "
का बेअसर तिलिस्म बंधा होगा ।
गोलियों का कारोबार तुम नहीं समझोगे सांता !
तुमने तो सिर्फ टौफ़ियाँ ही बांटी हैं
इस बार उनके चेहरों की रौनक लौटा देना
बच्चे हैं ,जल्द ही सब भूल जायेंगे...
उनके हाथों में गोलियाँ थमाते वक़्त
ऐसी ही मज़बूत दिलासा देते आना
गोलियाँ सिर्फ़ मीठी ही होती हैं
बस , एक यही भरोसा जगाते आना सांता !
बस , एक यही भरोसा जगाते आना .....!
तुम आ रहे हो न सांता ?
सुना है तुम सिर्फ खुशियाँ बिखेरते हो
हम एक बरस और इंतज़ार कर लेंगे
तुम सरहद पार ही रुक जाना इस बार ।
चिमनी से आहिस्ता ही उतरना
कुछ माँयें तब से अब तक सोयी ही न होंगी
और अपने रेनडियर की रफ़्तार ज़रा धीमी ही रखना
कब्रें कहाँ कहाँ खुदीं हैं ,उसे ये क्या पता होगा ?
चीत्कारें अब सिसकियाँ बन चुकी होंगी
तुम जिंगल बेल्स के जादू से उन्हें गुम कर देना
अपने हाथ की छड़ी घुमा कर
स्कूल की दीवारें फिर से सफ़ेद कर देना
क्यूंकि लहू के धब्बों से तो
तुम्हें भी नफरत होगी न सांता ?
लाल टोपी -जुराबों की तो कमी ही न होगी तुम्हें
ढेर सारे छितरे पड़े होंगे यहाँ वहाँ
कुछ किताबें भी बिखरी होंगी
जिन पर लिखे हर्फ़ अब भी
खौफ़ से कंपकपा रहे होंगे ।
मासूम चेहरों और मुस्कराती आँखों की उम्मीद लेकर
मत जाना वहाँ !
उनके तकिये के नीचे ताबीज़ दबे होंगे
जिनमें "नींद आए तो भयानक ख़्वाब न सताये "
का बेअसर तिलिस्म बंधा होगा ।
गोलियों का कारोबार तुम नहीं समझोगे सांता !
तुमने तो सिर्फ टौफ़ियाँ ही बांटी हैं
इस बार उनके चेहरों की रौनक लौटा देना
बच्चे हैं ,जल्द ही सब भूल जायेंगे...
उनके हाथों में गोलियाँ थमाते वक़्त
ऐसी ही मज़बूत दिलासा देते आना
गोलियाँ सिर्फ़ मीठी ही होती हैं
बस , एक यही भरोसा जगाते आना सांता !
बस , एक यही भरोसा जगाते आना .....!
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