Wednesday, 9 November 2016

सफेद ज़हर के सौदागरों के सीनों में
रेत के सोते बहते हैं
जो भरभरा कर नेस्तनाबूत कर देते हैं
कुछ बीवियों के जागते ख्वाब
और उन तमाम बच्चों के ढेर सारे ह्वाई किले
जिनकी उँगलियाँ सिर्फ आँखें पोंछने के ही काम आती हैं ...!
उन्हें सुनाई देती है
'खुराक 'के बदले मिले सिक्कों की खनक ,
जो उनके महलों की soundproof दीवारों के कानों को
झिंझोड़ कर जगा देती है .

उन्हें दिखाई देती है
'बटन'के दावेदारों की अधमुन्दी पलकें
जो मेंड्रेक्स और मेंथाकुलिन के फर्क को समझने में
नाकाम हो चुकी है ....!

वे महसूस करते हैं
सफेद काले धुँए में गलते ज़िस्मानी खोल
और 'उड़ते पंजाब'की राह उन्हें दूसरी दुनिया के
करीब पहुँचा देने की तलब ....!
सुनो ,
अबकी बार तुम्हारे कुछ देखने -सुनने -महसूसने से पहले
आवाज लगा लेना उन ज़िन्दा मुर्दों में से किसी एक को ,
और
झाँक लेना उसकी पीली सफेद आँखों के सूखे पानी में ...
तुम्हें बिना पूछे सवालों के जवाब जानने का ,
हुनर आ जायेगा  !!!
-नीलम

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