तुम्हे शायद मालूम नहीं कि बहने से ज्यादा रिसने में
दर्द होता है
वर्ना तुम अपने अश्कों की
दुहाई नहीं देते
बल्कि गैरों के जख्मों पर वर्ना तुम अपने अश्कों की
दुहाई नहीं देते
कोई सौगंध उठाते
बहना तो चांदनी है बादल है
सागर है
मगर रिसना ....
सूरज की आग /साँसों का ताप
धरती के अन्दर का लाल गरम लावा
सीने में दबी ख्वाहिश
हथेली पे खिंची कोई रेखा
होठों पर जलती मोमबत्ती है
अब तुम ही कहो
आँखों से झरती ओस की बूंदें
और होठों पर पिघल रही मोम में से
किसे पोंछ देना आसान है
बहुत सुन्दर...
ReplyDeleteअनूठे बिम्ब बेहतरीन ख़याल ,गहरी अभिव्यक्ति.
क्या बात है.
apka bhi har andaz khas hai chahe wo news reading ho ya royal shadi ki reporting.thanx
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