उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
...निष्कासन का एक छिद्र तलाश करना.....क्या इतना आसान है !!बहुत गहरी बात है..!!आपकी कविताओं को पढ़कर मुझे पक्का विश्वाश हो गया है...कि आप उदयपुर के तो नहीं हो.
amazing!YES!!
...निष्कासन का एक छिद्र तलाश करना.....क्या इतना आसान है !!
ReplyDeleteबहुत गहरी बात है..!!
आपकी कविताओं को पढ़कर मुझे पक्का विश्वाश हो गया है...कि आप उदयपुर के तो नहीं हो.
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