ज़रूर कुछ कहा है इन बूंदों के कानों में तुमने
तपती हुई सी बरस रही हैं...
अब भी बाकी रह गया हो कुछ
तो कल का इंतज़ार करना
आज फ़र्क समझ लेने दो
फुहारों और आँसुओं का !
तपती हुई सी बरस रही हैं...
अब भी बाकी रह गया हो कुछ
तो कल का इंतज़ार करना
आज फ़र्क समझ लेने दो
फुहारों और आँसुओं का !
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