कोकून
उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
Sunday, 10 July 2016
ये जो तुम्हारी टुकड़े टुकड़े प्रीत है न ....
मन को बहुत डरा देती है !
क्या होगा जो एक भी टुकड़ा
मुझ तक ना पहुंचा तो ?????
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