संभालो -
मिट्टी से उपजे किसलय की भांति
अपनी आगामी पीढ़ी की संतानों को.
संचरित करो -
स्वयं की शक्ति
आने वाले कल की कोख़ में.
उपसंहार करो -
कलुषित मनोवृत्ति से संक्रमित
विचारधारा के बहाव का ..
तभी -
उपादेयता सिद्ध कर सकोगी
अपने अस्तित्व के परिमार्जित होने की. ..
हे नारी!
केवल तुम ही हो भविष्य की
सुसँरचिता, स्वयंसिद्धा, शक्तिरूपा
परिभाषित करो पुनः
अपने होने का दावा
जो लुप्त प्राय हो रहा है
इतिहास बन रहा है
आने वाले काल में ... असमय ही!!!
मिट्टी से उपजे किसलय की भांति
अपनी आगामी पीढ़ी की संतानों को.
संचरित करो -
स्वयं की शक्ति
आने वाले कल की कोख़ में.
उपसंहार करो -
कलुषित मनोवृत्ति से संक्रमित
विचारधारा के बहाव का ..
तभी -
उपादेयता सिद्ध कर सकोगी
अपने अस्तित्व के परिमार्जित होने की. ..
हे नारी!
केवल तुम ही हो भविष्य की
सुसँरचिता, स्वयंसिद्धा, शक्तिरूपा
परिभाषित करो पुनः
अपने होने का दावा
जो लुप्त प्राय हो रहा है
इतिहास बन रहा है
आने वाले काल में ... असमय ही!!!
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