उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
ज़रा सी धूप छिटक दो
तुम्हारे चेहरे के सूरज से,
रेत के धोरों पर ऐसा सुनहरा समंदर
देखा न होगा किसी ने .....!!!
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