तुम्हारे जाने के बाद
--------------------
जब तुम मिलने आओ
तो पूरब की हवा की सारी
नमी लेते आना
जिसे मैं अपनी
झीलों के किनारे छोड़ दूंगी
और हमारे शहर का हर कोना
तुम्हारी गंगा सा पवित्र हो जायेगा .
तुम चाहो तो चाँद सितारे सी
वो बिंदिया भी लेते आना
जो सड़क पार वाली उस दुकान पर
मैं यूँ ही छोड़ आई थी चलते चलते
जबकि मैं जानती थी कि
वो मेरे माथे को सूरज बना देगी .
लाना चाहो तो अपने घर के
पिछवाड़े के कोने में थमी
वो धूप भी लेते आना
जिसमें अक्सर तुम्हारी गिलहरी
सुस्ताया करती थी
जाड़े के दिनों में .
यूँ तो बादल की वह चादर भी
अब तक वहीँ सूख रही होगी
तुम्हारी छत की अलगनी पर
जिसमें सफ़ेद रंग के धुंधले से
फूल काढने लगी थी मैं
और तुमने कहा था
इसे हरा बना दो .
आते हुए माँ के हाथों की
खुशबू भी समां लाना
अपने लापरवाह से बालों में
जिनमें सिरदर्द का बहाना करके
तुम बार बार तेल लगवाते थे
और मैं तकिये के गिलाफ को
गर्म पानी में डुबोना
भूल जाया करती थी .
अगर ये सब कुछ तुम न भी लाओ
तो ऐसा कुछ नहीं होगा
तुम्हारे आने पर
कि तुम फिर कभी न आने का
वादा कर सको
मेरी झीलें ,मेरी बिंदिया ,
मेरी धूप ,मेरी धड़कन -
कुछ भी नहीं बदलेगा .
ये सब कुछ हमेशा बदलता है
सिर्फ तुम्हारे जाने के बाद ..........
मेरी धूप ,मेरी धड़कन -
ReplyDeleteकुछ भी नहीं बदलेगा .
ये सब कुछ हमेशा बदलता है
सिर्फ तुम्हारे जाने के बाद ..........
एक भावप्रवण सुन्दर रचना के लिए बधाई..
ek bhavuk hriday hi is gahrai se meri rachna ko sarah sakta hai...dhanywad leena ji .
ReplyDeleteमेरी धूप ,मेरी धड़कन -
ReplyDeleteकुछ भी नहीं बदलेगा .
ये सब कुछ हमेशा बदलता है
सिर्फ तुम्हारे जाने के बाद ........
बेहद भावपूर्ण और कोमल रचना, बधाई स्वीकारें.