उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
Wednesday, 12 September 2012
सुनी सुनी उन सब कहानियों को सुनो जो बार बार ठहर कर तुम्हारा पता पूछती हैं और अचानक पेड़ की फुनगियों पे टंग जाती हैं परिंदों की उस चहचहाहट को भी सुनो जिसमें सारे जहाँ का संगीत समाया है मगर शब्दों की रोशनियाँ अब भी गुमसुम हैं....
No comments:
Post a Comment