फूल यूँ ही आग नहीं उगलते
ज़रूर चांदनी से इलज़ाम बरसे होंगे रात भर ....
धुआं धुआं प्रीत ने
तमाम गिरहें खोल ,
बिछा दी है शब्दों की चादर
जिद है तो तहा कर रख दो -
कविता फिर उम्र भर न बिखरेगी ...!
यकीन मानो -
जब सिलसिले शुरू होते हैं
तो सहूलियतें किनारा कर लेती हैं
अक्सर दो चार काँटों से
बाड बनाने की कोशिशें
नाकामयाब होती हैं
यूँ न हो कि कुछ देर सुस्ताने भर से
मंजिलों का नामोनिशान ओझल हो जाये ...
वक़्त का तकाजा है
कविता को उगना है
फूलों को महकना है
चाँद बार बार अश्क ना बरसाये
पत्थरों की अफवाहों पे धूल पड़ जाये
तमाम खुशबुएँ सिलसिलेवार बिखर जाएँ .....
तब भी फूल आगउगलना न छोड़ें
तो -
हथेलियों के कटोरे बना
मेरी आँखों के पानी से
मुस्कराहट छिड़क देना .वहाँ ..........!!
ज़रूर चांदनी से इलज़ाम बरसे होंगे रात भर ....
धुआं धुआं प्रीत ने
तमाम गिरहें खोल ,
बिछा दी है शब्दों की चादर
जिद है तो तहा कर रख दो -
कविता फिर उम्र भर न बिखरेगी ...!
यकीन मानो -
जब सिलसिले शुरू होते हैं
तो सहूलियतें किनारा कर लेती हैं
अक्सर दो चार काँटों से
बाड बनाने की कोशिशें
नाकामयाब होती हैं
यूँ न हो कि कुछ देर सुस्ताने भर से
मंजिलों का नामोनिशान ओझल हो जाये ...
वक़्त का तकाजा है
कविता को उगना है
फूलों को महकना है
चाँद बार बार अश्क ना बरसाये
पत्थरों की अफवाहों पे धूल पड़ जाये
तमाम खुशबुएँ सिलसिलेवार बिखर जाएँ .....
तब भी फूल आगउगलना न छोड़ें
तो -
हथेलियों के कटोरे बना
मेरी आँखों के पानी से
मुस्कराहट छिड़क देना .वहाँ ..........!!

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