कोकून
उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
Saturday, 8 March 2014
तुम्हारे उलाहने वक़्त रहते अकेले पड़ जाएंगे ...देखना अब चाँद की नज़र ...मुझे देखती तुम्हारी ...निगाहों से ना हटेगी ....!!!
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