Saturday, 12 July 2014

कागज़ की तरह तुड़े मुड़े अहसासों को
हथेली से सपाट करके
तहा  कर रखा एक कोने में
ऐश ट्रे तुम्हारे पुराने जुराबों में ढूंस कर
सरका दी है दुछत्ती पे
यहाँ वहां बिखरे डियो के कैन
कल ही कबाड़ी को दिए
एक दो बिना रिफिल के पैन थे
और कुछ फाइल कवर्स भी
सब डस्ट बिन को नज़र किये।
दराज़ में दिखी नहीं तुम्हारी
बकवास गानों वाली सी डीज़ और पेन ड्राइव्स
शायद समेट ली होंगी जाने से पहले …
अब कुछ बाक़ी नहीं रहा हमारे बीच
लगता है
पहले भी कभी कुछ नहीं था ....... !!!

1 comment:

  1. Behatareen..!
    Khali samay me aapke blog pe aane ki adat ho gayi hai..

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