कागज़ की तरह तुड़े मुड़े अहसासों को
हथेली से सपाट करके
तहा कर रखा एक कोने में
ऐश ट्रे तुम्हारे पुराने जुराबों में ढूंस कर
सरका दी है दुछत्ती पे
यहाँ वहां बिखरे डियो के कैन
कल ही कबाड़ी को दिए
एक दो बिना रिफिल के पैन थे
और कुछ फाइल कवर्स भी
सब डस्ट बिन को नज़र किये।
दराज़ में दिखी नहीं तुम्हारी
बकवास गानों वाली सी डीज़ और पेन ड्राइव्स
शायद समेट ली होंगी जाने से पहले …
अब कुछ बाक़ी नहीं रहा हमारे बीच
लगता है
पहले भी कभी कुछ नहीं था ....... !!!
हथेली से सपाट करके
तहा कर रखा एक कोने में
ऐश ट्रे तुम्हारे पुराने जुराबों में ढूंस कर
सरका दी है दुछत्ती पे
यहाँ वहां बिखरे डियो के कैन
कल ही कबाड़ी को दिए
एक दो बिना रिफिल के पैन थे
और कुछ फाइल कवर्स भी
सब डस्ट बिन को नज़र किये।
दराज़ में दिखी नहीं तुम्हारी
बकवास गानों वाली सी डीज़ और पेन ड्राइव्स
शायद समेट ली होंगी जाने से पहले …
अब कुछ बाक़ी नहीं रहा हमारे बीच
लगता है
पहले भी कभी कुछ नहीं था ....... !!!
Behatareen..!
ReplyDeleteKhali samay me aapke blog pe aane ki adat ho gayi hai..