कोकून
उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
Monday, 11 January 2016
समंदर किनारे लोग
फँसाते मछलियाँ
घोंपते खंजर
अक्सर पीठ पर -
कभी तो वे समझेंगे
इस्तेमाल सिर्फ वस्तुएँ होतीं हैं
इंसान नहीं ... !!!
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