प्रकृति दोहन सदैव विनाश का कारण बना है. इतिहास साक्षी है कि मनुष्य का अहंकार जब जब उसे प्रकृति का स्वामी मानने पर विवश कर देता है, तब तब प्रकृति उसे आईना दिखा देती है. बुद्धिमत्ता इसमें है कि हम उस आइने में वास्तविकता को देखें और सबक सीखें.
मृत्यु कदापि जीवन का आधार नहीं बन सकती .भला शवों पर अट्टालिकाओं का निर्माण कैसे हो सकता है? ईश्वर प्रदत्त प्रकृति के साथ खिलवाड़ करके मनुष्य अपनी मूर्खता ही सिद्ध कर रहा है. महामारियों का प्रकोप एक चेतावनी मात्र है जिसे जितना शीघ्र समझा जाए, उतना ही कुशल है. आशा की किरण अंधकार में अधिक चमकती है. उम्मीदों के बादल दुर्भिक्ष के पश्चात अधिक बरसते हैं. प्रकृति के संकेत समझने का यह अंतिम अवसर है.
मृत्यु कदापि जीवन का आधार नहीं बन सकती .भला शवों पर अट्टालिकाओं का निर्माण कैसे हो सकता है? ईश्वर प्रदत्त प्रकृति के साथ खिलवाड़ करके मनुष्य अपनी मूर्खता ही सिद्ध कर रहा है. महामारियों का प्रकोप एक चेतावनी मात्र है जिसे जितना शीघ्र समझा जाए, उतना ही कुशल है. आशा की किरण अंधकार में अधिक चमकती है. उम्मीदों के बादल दुर्भिक्ष के पश्चात अधिक बरसते हैं. प्रकृति के संकेत समझने का यह अंतिम अवसर है.
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