सोना बन जाने की चाहत
पनीली आँखों को समुंदर
पीने की आदत
झिरती बूंदों को अंजलि में
समेटने की मशक्कत
उफनती लहरों से पत्थर
उठाने की हरकत
शब्दों को छंदों से
बतियाने की फुर्सत
फटने से पहले बम के
परमाणु की हालत
विचित्र है समय की
परखने की ताकत -- -- --
अवसाद के अधरों पर
प्रणय का अल्प -विराम
असंभव को पाने में
संवेगों का कोहराम
लगता है -
यंत्रणा का दौर अभी
थमा नहीं है
जो शेष है
अशेष अभी बना नहीं है .

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ReplyDeleteशायद यही सच है यंत्रणा का दौर अभी थमा नहीं है ,बूंद जब फूलों पर गिरती हैं तो उनमे आँखें होती है
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