Friday, 20 May 2011

तुम्हारा साथ 

कभी कभी तुम्हारा साथ वैसा ही होता है 
जैसे बारिश की बूंदों में नहाये 
पेड़ों का हरापन 
या आसमान में पंछियों की 
कतारों का तिरछापन .
     सब कुछ दूधिया सा ,
     कहीं कहीं नीला भी 
     कुछ ऐसा -
     जिसमें संदेहों के सारे सितारे 
     टूटकर बिखर जाएँ 
     और 
     इतने दूर तक छिटक जाएँ 
     कि हमारी तुम्हारी किसी भी 
     दुआ -बद्दुआ से 
     कभी लौट कर न आयें ....

1 comment:

  1. मन को सहलाते और दुलराते हुए कविता बीत जाती है

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