टुकड़ों टुकड़ों में मिलती हैं खुशियाँ
और एक टुकड़े को दुसरे से जोड़ने में
लग जाते हैं
पीडाओं के अनगिनत धागे ....
नफरतों की तीखी सुई की चुभन से
छलक पड़ती हैं ऑंखें
और ज़ज्ब हो जाती है नमी
फिर से उन्ही टुकड़ों में ......
आसान नहीं है
एक भीगे टुकड़े को दूसरे तक पहुँचाना ,
एक कोना भी अटक जाये
तोहमतों के काँटों में
तो देर नहीं लगती
घावों की बखिया उधड़ने में --
यूँ ही चलती हैं कोशिशें
और-
जीती रहती हूँ मैं
एक सीली सी
पैबंद लगी जिंदगी ......!

wah..!
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