सुनो प्रेम,तुम लौट आओ !
इन दिनों कुछ भी नहीं सुहाता
न धूप ,न बादल ,न हवा ,न ही फूल
तमाम रंग बदल गए हैं मौसम के ....!
चलो ,साथ चल के
बादलों के माथे का पसीना पोंछेंगे
जो हैरान हैं अचानक
झील की हलचल थम जाने से !
उन हवाओं से भटकने की वज़ह पूछेंगे
जिनकी राह में कितने ही भीगे आँचल
टंग रहे हैं दालानों में !
आओ ,सवाल करेंगे बिखरते फूलों से
कि लरजती खुशबुओं की फितरत
कबसे बदल दी तुमने ?
सुनो प्रेम ,
तुम्हारे आने जाने से
मौसम नहीं -मिज़ाज बदलते हैं ....
एक बार पलट कर देखो तो सही
सब कुछ वहीँ का वहीँ थमा है
बसंत के पांवों में पहिये लगाने के लिए ही सही
प्रेम , तुम लौट आओ ......!!!
इन दिनों कुछ भी नहीं सुहाता
न धूप ,न बादल ,न हवा ,न ही फूल
तमाम रंग बदल गए हैं मौसम के ....!
चलो ,साथ चल के
बादलों के माथे का पसीना पोंछेंगे
जो हैरान हैं अचानक
झील की हलचल थम जाने से !
उन हवाओं से भटकने की वज़ह पूछेंगे
जिनकी राह में कितने ही भीगे आँचल
टंग रहे हैं दालानों में !
आओ ,सवाल करेंगे बिखरते फूलों से
कि लरजती खुशबुओं की फितरत
कबसे बदल दी तुमने ?
सुनो प्रेम ,
तुम्हारे आने जाने से
मौसम नहीं -मिज़ाज बदलते हैं ....
एक बार पलट कर देखो तो सही
सब कुछ वहीँ का वहीँ थमा है
बसंत के पांवों में पहिये लगाने के लिए ही सही
प्रेम , तुम लौट आओ ......!!!

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