Sunday, 9 February 2014

 रेत के प्यालों में छुपा के रखती है वो 
अपने तमाम नम हुये ख्वाबों को ...
देखना एक रोज़ ...तुमसे मुलाक़ात का सूरज 
सोख लेगा प्यास की गठरी ...
और तब बिखर जाएगी 
दहलीज़ पर चाँदनी ही चाँदनी ......!!!!

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