रेत के प्यालों में छुपा के रखती है वो
अपने तमाम नम हुये ख्वाबों को ...
देखना एक रोज़ ...तुमसे मुलाक़ात का सूरज
सोख लेगा प्यास की गठरी ...
और तब बिखर जाएगी
दहलीज़ पर चाँदनी ही चाँदनी ......!!!!
अपने तमाम नम हुये ख्वाबों को ...
देखना एक रोज़ ...तुमसे मुलाक़ात का सूरज
सोख लेगा प्यास की गठरी ...
और तब बिखर जाएगी
दहलीज़ पर चाँदनी ही चाँदनी ......!!!!
No comments:
Post a Comment