कोकून
उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
Monday, 24 February 2014
बहुत से रंग भाने लगे हैं
अब मैं सफ़ेद दुपट्टा नहीं ओढ़ती
सच है
जब मन बसंती हो तो
मौसम का कुछ भी कहना सुहाता है ....!
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