हर जाने अनजाने शख्स की तलाश की मैंने
मगर सिर्फ खुद को ही पाया वहां
तमाम पगडंडियाँ भर चुकी थीं
झाड़ियों से
और मेरे पैरों के निशानों का
भ्रम भी नहीं था कहीं भी -
मालूम है अन्तरिक्ष में बसने लगे हैं लोग
और परियों से दोस्ताना भी है मेरा
पर यूँ इस तरह गुमशुदा नहीं हुआ जाता! !
मुझे लगा था मैंने ही वह शहर छोड़ा है .....मगर ....
दरअसल
वह शहर ही मुझे छोड़ गया कभी का .......!!!
मगर सिर्फ खुद को ही पाया वहां
तमाम पगडंडियाँ भर चुकी थीं
झाड़ियों से
और मेरे पैरों के निशानों का
भ्रम भी नहीं था कहीं भी -
मालूम है अन्तरिक्ष में बसने लगे हैं लोग
और परियों से दोस्ताना भी है मेरा
पर यूँ इस तरह गुमशुदा नहीं हुआ जाता! !
मुझे लगा था मैंने ही वह शहर छोड़ा है .....मगर ....
दरअसल
वह शहर ही मुझे छोड़ गया कभी का .......!!!
धन्यवाद !
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