हरी वादियाँ ,सुनहरी रेत
नीला समन्दर ,पीले खेत
लाल है टेसू ,गुलाबी हैं गाल
गेरुआ-सा मन,सतरंगी है गात
सुनो......रंग बतियाते भी हैं !!
प्रेम प्रीत का रंग हो गहरा
राग द्वेष नहीं रहे सदा
मुस्कान बिखेरे आती हवा
फागुन महकाए जाता फिज़ा
सुनो...... रंग गुनगुनाते भी हैं !!
भाँग का सुरूर ,उपहारों की उमंग
फुहारें ख़ुशी की ,मस्ती के संग
बीते बरस की यादें अपार
ग़मों को भिगोए प्यार की बौछार
सुनो.......रंग बहकाते भी हैं !!!
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