पुराने कबाड़ से भरी दुछत्ती में
अब भी गंधाती है
पूर्वजों के हाथों की महक...
नमी के कटोरे पलकों से
ढक कर रखना
ऑक्सीजन सिलेंडर से चलती
बेतरतीब सांसों का संबल बनेंगे।
घेरों के भीतर मछली पालते भ्रम में
कृत्रिम घास का हरापन उछालें मारेगा ।
पत्थर की चक्की पर
लकीरें खींचते कल की आँखों में
आँगन का सौंधापन कहां से आएगा?
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