कोकून
उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
Friday, 20 June 2025
सृजन के मिट गए अवरोध सारे अब तो एक ग्रंथ रच लिया होगा, श्वास, आत्मा, स्पंदन शेष है अभी जो मेरे स्पर्श की प्रतीक्षा भला क्यों करेगा?
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