धूप की गंध
लापरवाही के खुरदरे रंग ओढ़े
तमाम पगडन्डियों की नमी को चटकाते हुये
मेरे चारों ओर बस गयी है...
ऐसे में खूबसूरती शब्द ही
उपहास उड़ाता प्रतीत होता है.
तुमने अब तक धधकती धरा पर
पानी के बीज नहीं बोये ना ?
कोशिश करके देखना
सिर्फ धुआं निकलता है...
धूप ,धुआं और धुंध -
इनका ख़याल निकले
तो बारिशों की रंगोली सजाऊँ !!!
लापरवाही के खुरदरे रंग ओढ़े
तमाम पगडन्डियों की नमी को चटकाते हुये
मेरे चारों ओर बस गयी है...
ऐसे में खूबसूरती शब्द ही
उपहास उड़ाता प्रतीत होता है.
तुमने अब तक धधकती धरा पर
पानी के बीज नहीं बोये ना ?
कोशिश करके देखना
सिर्फ धुआं निकलता है...
धूप ,धुआं और धुंध -
इनका ख़याल निकले
तो बारिशों की रंगोली सजाऊँ !!!
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