क्यूँ हलकी सी खरोंच को कुरेद कर
यूँ ही छोड़ देते हो
और ज़ख्मों की गिनती
बेवज़ह बढ़ जाती है .?
अब छोड़ दो यूँ तल्खियों में जीना
ज़रा याद करके बताना कि -
क्या अब भी बाकी है
मेरी हथेलियों में बसी साँसें
तुम्हारे कंधे पे ??
जहाँ दम तोड़ने से पहले
हाथ ज़रा सा टिक गया था .....
यूँ ही छोड़ देते हो
और ज़ख्मों की गिनती
बेवज़ह बढ़ जाती है .?
अब छोड़ दो यूँ तल्खियों में जीना
ज़रा याद करके बताना कि -
क्या अब भी बाकी है
मेरी हथेलियों में बसी साँसें
तुम्हारे कंधे पे ??
जहाँ दम तोड़ने से पहले
हाथ ज़रा सा टिक गया था .....
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