झील में नमक सी तुम्हारी आवाज़
अक्सर यादों की लहरों पे बहती
अतीत के किनारों से टकराती है
और सन्नाटे संगीत में बदल जाते हैं .....
इस बार मिलो तो
अपनी आवाज़ की पोटली
मुझे दे जाना ...
कुछ गहरी नज़रें ,मासूम शरारतें
और बातों का पिटारा भी ...!
मुझे बूँद दो बूँद नहीं
बौछारें चाहिए तुम्हारी मुस्कराहटों की
ताकि उदासी के मौसम
अब पलट कर भी ना देखें मुझे ....!!!
अक्सर यादों की लहरों पे बहती
अतीत के किनारों से टकराती है
और सन्नाटे संगीत में बदल जाते हैं .....
इस बार मिलो तो
अपनी आवाज़ की पोटली
मुझे दे जाना ...
कुछ गहरी नज़रें ,मासूम शरारतें
और बातों का पिटारा भी ...!
मुझे बूँद दो बूँद नहीं
बौछारें चाहिए तुम्हारी मुस्कराहटों की
ताकि उदासी के मौसम
अब पलट कर भी ना देखें मुझे ....!!!
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