कोकून
उलझे रेशम सी संवेदनाओं से संवाद करता मन ...कभी कभी तितली बन उड़ जाना चाहता है!!!
Saturday, 28 December 2013
एक उम्र गुज़ारी बगैर तुम्हारे
अब कुछ लम्हे खड़े हैं इंतज़ार में …
गुज़रो इधर से
तो नज़र भर देख लेना।
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