Sunday, 29 December 2013

कभी कभी सब कुछ खत्म नहीं होता ...चाहो तो भी नहीं 
वो बचा हुआ यूं ही कहीं 
बिखरा सा ,सिमटा सा 
अचानक मेरे पास से तुम्हारे पास 
और तुम्हारे पास से मेरे पास 
आने जाने में ही 
बढ़ता चला जाता है .....लगातार....
और किस्से घटने की बजाय 
बेतहाशा दौड दौड़ के बनने सवरने लगते हैं 
फिर से .....!!!

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