बिखरा था कल सब कुछ यहाँ वहाँ ,आज समेटने की कोशिश की ....
तो आँख भर आयी ....याद है तुमने कहा था ...
जो समेटा मेरे वजूद को,
तो रेत की सिलवटों में... कतरा भर जगह न बचेगी ....
तुम्हारी आँखों की नमी को !!
तो आँख भर आयी ....याद है तुमने कहा था ...
जो समेटा मेरे वजूद को,
तो रेत की सिलवटों में... कतरा भर जगह न बचेगी ....
तुम्हारी आँखों की नमी को !!
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