Saturday, 28 December 2013

हर रोज़ सुबह ओस सी टपकती है तुम्हारी याद
सूरज के चढ़ते ही धुंध हो जाती
फिर रात के नम होने का इंतज़ार करती। …
सुनो ,
ओस का गिरना सिर्फ फूलों की मुस्कराहट ही नहीं उगाता
मुझे भी सूरज को देर तक सोये रहने का
वास्ता देना पड़ता है। …… 

No comments:

Post a Comment